मोदी सरकार के कार्यकाल का दूसरा सत्र शुरू हुआ। इस सत्र के दूसरे दिन विपक्ष ने कला धन मुद्दे पर हंगामा किया। इस हंगामे से उन्हें क्या मिला यह तो वही जाने पर कला धन पर उनकी बेचैनी समझ से पर है। जहाँ तक मेरी यादास्त का सवाल है तब मैंने बचपन में स्विस बैंक में बड़े लोगो द्वारा पैसे जमा करने की बात सुनी थी और उसे अबतक सुनता आ रहा हूँ। इस मुद्दे पर हंगामा करने वाले/ वाली दोनों या तो कांग्रेस के साथ रहे हैं या फिर उनको सुबिधा के अनुसार समर्थन देते रहे है। और कांग्रेसियों का इस पर बोलना तो वैसा ही है की सूप बोले तो बोले छलनी भी बोले जिसमे ७६ छेद। २१ वीं सदी की शुरुआत में पहले चार साल तक राजग सत्ता में रही परन्तु उस सरकार को कला धन को वापस लाने का ख्याल नहीं आया या फिर उसने इस पर ध्यान नहीं दिया। उसकै बाद दस सालों तक देश में कांग्रेस नीट संप्रग की सरकार रही और इसी दौरान कला धन का मुद्दा जोर सोर से उठा। पहला पांच साल तो ठीक से गुजरा पर दूसरे कार्यकाल में कई मामलों को लेकर सरकार की काफी छीछालेदर हुई। संसद , सड़क और कोर्ट हर जगह उसे लानत मलानत झेलनी पड़ी। आज वही कांग्रेसी मोदी से कला धन लाकर उसमे अपना हिस्सा मांग रहे हैं। इससे यह ध्वनित होता है की कांग्रेस को इसी दिन का इंतजार था कि कोई और सरकार आये और स्विस बैंक से पैसा निकल कर उन्हें दे दे.. पता नहीं जब ये सत्ता में थे कला धन वापस क्यों नहीं लाये। रही बात ममता बनर्जी की तो वो तो कांग्रेसी रह चुकी हैं। सरकार बनाने के लिए कांग्रेस समर्थन दे चुकीं हैं उस दौरान उन्हें कला धन याद क्यों नहींआया। लगता हा सारधा घोटाले से ध्यान हटाने के लिए ममता इस तरह का राग अलाप रहीं हैं। वर्धमान बम विस्फोट भी उनके गले की हड्डी बना हुआ है। इन सबसे पीछा छुड़ाने और अपने मतदाताओं पर पकड़ बरकरार रखने की मजबूरी उन्हें इस मुद्दे को उठाने को बाध्य कर रही है। रही मुलायम सिंह यादव की बात तो उनकी पार्टी सुबिधा के अनुसार समर्थन लेती और देती है। लोकसभा चुनावों के बाद यूपी में नेपथ्य में चल रही समाजवादी पार्टी के लिए यह एक अच्छा मौका हैं। इस तरह की कवायद में जनता परिवार के नेता काफी समय से जुटें हैं। लेकिन कुछ दिन पहले जब लालू यादव ने मुलायम से यूपी में पुरे विपक्ष को भाजपा से मुकाबले के लिए एकजुट होने की बात की तो मुलायम ने तंज कसते हुए कहा था लालू आ कर मायावती से मेल करा दे। लेकिन अब उन्हीं लालू यादव के साथ मुलायम गलबहियां करते नजर आ रहें हैं। कुल मिला कर राजग को छोड़ हर पार्टी काला धन में हिस्सा पाने के लिए बेचैन है। उन्हें लगता है कि यदि सरकार वाकई काला धन वापस लाती है तो उनका हिस्सा आम लोगों में न बाँट दिया जाय। वैसे काला धन वापस लाना सरकार के लिए भी फ़िलहाल दिवास्वप्न जैसा ही है। चलिए नेताओं की बेचैनी सरकार को जल्द काल धन लाने पर मजबूर कर दे तो फायदा तो हम देश वालों को ही होगा।
मंगलवार, 25 नवंबर 2014
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