2जी घोटाला मामले में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने सभी 25 आरोपियों को बरी कर दिया है। इस पैसले से कांग्रेस का खुश होना लाजिमी है। उसका मानना है कि इस फैसले ने उसपर लगा एक बड़ा दाग धो दिया । पर अभी उसकी खुशी वैसी ही है जैसे चलो भाई ये दाग है तो दाग ही अच्छे है। फसले के खिलाफ उपरी अदालते क्या निर्णय देंगी यह तो भविष्य के गर्भ में है। पर यह खुशी कुछ दिन की खुशी होगी या फिर स्थाई यह कहना अभी मुश्किल है।
कल तक इस मुछ्दे पर रक्षात्मक रुख रखने वाली कांग्रेस के नेता एकाएक हमलावर होने लगे हैँ। गुलाम नबी आजाद कहते है कि जिस घोटाले की वजह से यूपीए 2 की सरकार चली गई वह घोटाला हुआ ही नहीं। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह जो हमेशा चुप रहने के लिए जाने जाते है वह भी इस फैसले पर चहक उठे और कहा 'मेरे खिलाफ किया गया दुष्प्रचार निराधार साबित हुआ।
जीरो लॉस का सिद्धांत देने वाले पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल तो बल्लियों उछलने लगे । उन्होंने सरकार को ललकारते हुए कहा कि हमारा 'जीरो लॉस' का दावा सिद्ध हो गया है, जिन लोगों ने उन पर आरोप लगाए उन्हें माफी मांगनी चाहिए। 'आज मेरी बात सिद्ध हो गई, कोई घोटाला नहीं, कोई घाटा नहीं। अगर घोटाला है तो, झूठ का घोटाला है, विपक्ष और विनोद राय के झूठ का। और तो और सिब्बल ने विनोद राय से पूरे देश के सामने माफी मांगने की मांग भी कर डाली।
जािहर है सरकार की ओर से इसका जवाब उाना था और आया भी। कांग्रेस की बौछारों का सामना करने आये वित्त मंत्री अरुण जेटली।
अपने आरोपों पर पूरी तरह कायम रहते हुए उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा इस फैसले को कांग्रेस सममान पत्र की तरह लहरा रही है। उन्होंने यूपीए की स्पेक्ट्रम आवंटन नीति को पूरी तरह भ्रष्ट करार देते हुए 2012 में सुप्रीम कोर्ट के पैसले का हवाला भी दिया। यही नहीं लगे हाथ आंकड़ो से उन्होने कांग्रेस को घेरा और कह कि जिस स्पेक्ट्रम पर पहले 1734 करोड़ मिल रहे थे 2015 में 1.10 लाख करोड़ रुपए मिले।
यह तो रही फैसले पर राजनीति की बात। अब इसके दूसरे पहलू पर गौर करते हैं। विशेष जज का दर्द यह है कि वह सात साल तक सबूतों का इंतजार करते रहे । कोई सबूत ले कर नहीं आया। मंशा जज साहब पर शक करने या फैसले पर उंगली उठाने की नहीं है। लेकिन मन में एक सवाल तो उठता ही है कि फिर सुप्रीम कोर्ट ने किस सबूत के आधार पर लाइसेंस रद्द किए थे। क्या विशेष जज महोदय ने इस ओर तनिक भी ध्यान नहीं दिया। मैं न कानून का जानकार हु नही उसका विश्लेषक पर एक सवाल तो मन में उठता ही है कि जिस सबूत पर सुप्रीम कोर्ट ने लाइसेंस रद्द किए क्या वे नाकाफी थे। यदि हां तो फिर तो यह गंभीर मामला है और नहीं तो फिर आज का पैसला।
यूपीए 2 की सरकार पर लगा यह एक बड़ा दाग तो है ही । जब कैग ने उंगली उठाई थी इस सरकार के मुखिया चुप थे। अगर आवंटन गलत था तो ए राजा को मंत्रिमंडल से बाहर क्यों किया गया। सरकार के कई कृत्यों खुद ही घोटाले का संदेह पैदा किया। रही सही कसर सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान दिए गये लाइसेंसों को रद्द कर पूरी कर दी। कोर्ट के आदेश पर ही मामले की सुनवाई विशेष अदालत में की गई। इस मामले में पराजित पक्ष सीबीआई का कहना है कि कोर्ट ने लिखित सबूतों पर मौखिक सबूतों को बरीयता दी। उसका कहना है कि वह इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देगी। अगर उस समय यह फैसला उलट गया तो जो आज दाग मिटने की बात कर रहें हैं तब क्या कहेंगे।
बाकी तो दाग अच्छे हैं और अच्छे रहेंगे।

