बुधवार, 13 दिसंबर 2017

खबरिया चैनल क्यों देखें?



सुबह हो या शाम। जब भी टीवी खोलो कुछ स्वनामधन्य विद्वान चैनलों पर  एक दूसरे के ऊपर खखुआते नजर आ जाते हैं। इसे देखकर लगता है कि खबरिया चैनलों से तो अच्छा है  तारक मेहता का उल्टा चश्मा या कोई और सीरियल वाला चैनल देख लो । इसमें कमसे कम यह तो पता ही रहता है कि यह नौटंकी है। पर खबर वाले तो खबर के नाम पर नौटंकी फलाते हैं।
वैसे भी इन खबरिया चैनलों के कर्ताधर्ता क्या करें ।  मालिक तो टीआरपी देखता है। टीआरपी विना नौटंकी के बढ़ नहीं सकती । एक और बात सबसे अलग दिखने की चाहत भी इन चैनलों को ऊलूल-जुलूल करने पर मजबूर कर देती है। अब देखिए खबरिया चैनल एक एैसे कथित नेता केबयान को ब्रेकिंग कह कर चलाने लगते हैं कि मशरूम खने से आदमी गोरा हो जाता है। और तो और यह मशरूम अस्सी हजार रुपये किलो बिकती है और ताइवान से आती है। दर्शक मूर्ख बनते रह और चैनल ब्रेकिंग चलाते रहे।  अरे भाई ब्रेकिंग के चक्कर में दूसरों का विश्वास न तोड़ो कम से कम कोई क्या बोल रहा है वह सत्य है कि नहीं इसकी तो छानबीन कर लो।
इसी तरह का दूसरा उदाहरण। जो आदमी नाबालिग होने के कारण चुनाव नहीं लड़ पा रहा है वह गुजरात चुनावों में मोदी और राहुल गांधी से इन चैनलो पर अधिक समय और जगह पा रहा है। गुजरात के  विकास के रोडमैप पर बात करने के लिए  सबसे पहले समय मिल जाए इसकी होड़ चैनलों में लगी रहती है।  अगर विकास के रोड मैप की बात ही करनी थी तो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बात करते, सैम पित्रोदा को बुलाते । लेकिन क्या करे मनमोहन सिंह और पित्रोदा टीआरपी नहीं दे सकते वह तो हार्दिक से ही मिलेगी। और दर्शक बेचारा क्या करे कहीं कोई काम की खबर मिल जाए इसके चक्कर में  इन ..आपों को झेलता रहता है।
कल गुजरात चुनाव खत्म हो जाएगा और शाम 6 बजे के बाद ये चैनल भारी भरकम लेकिन टुटपूंजिए राजनीतिक विश्लेष्क परिणम से पहले ही मंत्रिमँडल गठन करते नजर आएंगे। मोदी समर्थक विद्वान इसे मोदी का करिश्मा बताएंगे तो राहुल के समर्थक इसे राहुल का चमत्कार । कुछ इसे हार्दिक ,जिगनेश और अल्पेश की लड़ाई की जीत या फिर उनकी कमजोरी कहां रह गई इसका बखान करेंगें। जबकि आम दर्शक को इससे कोई मतलब नहीं रहता है।
यह तो रही गुजरात चुनाव की बात । ले दे के 18 को इसका शेर थम जाएगा । पर खबरिया चैनल चुनावी मोड से बाहर नहीं आ पाएंगे। भाजपा की तीत पर सब चैनल शुरू हो जाएंगे  2019 में कोई नहीं है टक्कर में । परिणाम भाजपा के पक्ष् में नहीं रहा तो सब चिललाना शुरु कर देंगे यह राहुल के अभ्युदय का समय है। पैनल में बैठे लोग अपने-अपने हिसाब से तर्क गढ़ कर अगले आम चुनावों में जीत हार की भविष्यवाणी करने में जुट जाएंगे। अरे भाई अगर यही देखना और सुनना है तो फिर क्यों न शुद्ध नौटंकी देखी जाए ।  विद्वानों की नौटकीं देखने से तो अच्छा है जो नौटंकी करने हैं उनको देख जाए कम से कम उनका हौसला तो बढ़ेगा।

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