बुधवार, 13 दिसंबर 2017

गुजरात 18 को कई अनुमान ध्वस्त होगे



आज यानि 12 दिसंबर को गुजरात में दूसरे और अंतिम चरण का प्रचार समाप्त हो गया। हर कोई अपनी-अपनी जीत का दावा करने में जुट गया है। पहले चरएा में 9 दिसंबर को मतदान हुआ था । कुल 65 से 67 प्रतिशत मतदान की बात हुई। अगला चरण 14 को होगा कितना मत पड़ेगा यह भविष्य के गर्भ में है। 18 को दोपहर तक परिणाम भी आ जाएगा।
पार्टियां जीत के दावे कर रहीं हैं वह तो ठीक है पर भाजपा और कांग्रेस के खेमें में बँटे पत्रकार जो गुजरात की जमीनी हकीकत का क ख ग घ भी नहीं जानते हैं अपनी अपनी भविष्यवाणी करने में जुट गये हैँ। यह सच है कि नरेद्र मोदी के लिए यह चुनाव सबसे कठिन है पर कांग्रेस नेतृत्व की अपरिपक्वता ने उन्हें फिर मौका दे दिया है। मैं भविष्यवक्ता नहीं हूं पर जो थोड़ी बहुत राजनीतिक समझ रखता हूं उसके अनुसार हिमाचल और गुजरात में  भाजपा पूर्ण बहुमत से सत्ता में आ सकती है। गुजरात में हार्दिक, मेवानी और जिग्नेश की त्रयी राहुल गांधी के साथ मिलकर जो चतुष्टाकक बनाया है उसका कमाल मोदी मैजिक को कितना कम कर सकता है आंकड़े इस पर निर्भर करेंगे।  मोदी ने अपने गृह राज्य में गुजरात अस्मिता की बात कर 10 से 15 प्रतिशत भाजपा के मतो का मार्जिन वैसे ही बढ़ा लिया है। रही सही कसर राहुल के मंदिर पिरक्रमा ने पूरी कर दी है। वास्तव में कांग्रेस ने गुजरात चुनावों में मोदी को मात देने की सटीक योजना बनाई थी। इसके तहत अपने को मुस्लिम मतो की ओर से तटस्थ रखकर हिन्दुओं को लुभाने की योजना बनाई थी। उनका मानना था कि मुस्लिम मत तो अपने हैं ही अब मंदिरों का रूख कर हिंदू मतो में सेंध लगाई जाय। पर उनकी इस योजना को खुद उन्हीं के लोगों ने सोमनाथ तक जाते जाते पलिता लगा दिया। विकास के नाम पर भाजपा को चुनौती देने निकले राहुल गांधी भाजपा की चाल में फंस गये और मंदिरों के चक्कर लगाने लगे। मैं यह नहीं कहता कि इससे  कांग्रेस का अल्पसंख्क आधार खत्म हो जाएगा पर इसका प्रतिकूल असर  उस वोट बैंक पर जरूर पड़ेगा जिसे कांग्रेस दशकों से अपना मानते आई है। हां एक बात और वाकई अगर गुजरात की जनता 22 साल के भाजपा शासन से उब गई है तब तो परिणाम  क्या होगा मैं इसका आंकलन करने में सक्षम नहीं हूं । परिणाम जो भी हो यह तय है कि कड़े मुकाबले वाली बात नहीं होगी परिणाम एकतरफा होगा। और इसमें फिलहाल भाजपा बढ़त लेते हुए दिख रही है।
यह सही है कि भाजपा के पास गुजरात में स्थानीय स्तर पर कोई चेहरा नहीं है पर कांग्रेस भी तो राज्य स्तर पर कोठ्र विकल्प नहीं दे पाई । अलबत्ता हार्दिक, अल्पेश और मेवानी को तरजीह देकर उसने अपने स्थापित क्षत्रपों को नाराज जरूर किया है। यह नाराजगी भले ही सामने न आई हो पर इसका असर चुनाव परिणामों पर जरूर पड़ेगा।
इंतजार कीजिए 18 दिसंबर का जब परिणाम आएंगे।  कई अनुमान ध्वस्त होंगे । कई व्याख्याएं धराशाई होगी। विद्वानों की बोलती बंद होगी तो कई अपनी बात से पलटते नजर आएंगे और दावा करेंगे कि मैने तो यह कहा था मैने तो वह कहा था। रही बात कांग्रेस की तो उसके पास तो पहले से जवाब तैयार है। उसके तमाम नेता एक स्वर से कहेंगे राहुल जी को इसका दोष कैसे दे सकते है। डनहोंने तो कमान हार्दिक और टीम को सौंप दी थी। हमने आंकलन में गलती की। हो यह जरूर होगा कि अगर कांग्रेस की सीटें बढ़ी, जिसकी संभावना है तो सब चिल्लाएंगे देखा राहुल जी की मेहनत का कमाल । हम भले ही जीत ना पाए पर मोदी को उनके गढ़ में घेर जरूर लिया। सीटों की बढ़त 5 से 7 सीटों तक सँभव है।हां यदि गुजरात का परिणाम कंग्रेस के पक्ष में गया तो यह मान लीजिए कि यह मोदी राज के अवसान की शुरूआत होगी और देश के राजनीतिक क्षितिज पर राहुल नाम के खानदानी तारे के उदय का प्रबल संकेत। वैसे इसकी संभावना कम है फिर भी राजनीति में कब क्या हो जाए कहा नहीं जा सकता ।
वाकी 18 को...

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