शनिवार, 7 फ़रवरी 2015

गणित से केमेस्ट्री फ़ैल

अगर  एग्जिट  पोल  के  नतीजे सही निकलतें हैं तो इसका मतलब अब नकारात्मक राजनीती का दौर  लद गया. दिल्ली  में हार के लिए  भाजपा  खुद जिम्मेवार है . अगर  पार्टी  नहीं चेती तो  बिहार बंगाल में इस साल और  १७ में  यूपी में भी ऐसा ही कुछ हो सकता है  . पैराशूट उम्मीदवारों  की जगह कार्यकर्ताओं पर  ध्यान ना देने पर  इसी तरह का परिणाम  मिलता  है . इसके साथ ही  दिल्ली में हर का एक और बड़ा कारण  है कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ  और साथ में मोदी विरोधी सभी झंडाबरदारों  का भी कजरी भाई के साथ आ जाना . यह स्थिति आगे भी जरी रह सकती है . भाजपा  जो भी कहे  उसके अश्वमेध रथ को आप ने तो रोक ही दिया है . कजरी भाई २०१४  के मोदी हो गए थे और भाजपा २०१३ के कजरी और उनकी टीम . इसलिए  शाह साहब  दनादन इम्पोर्ट  करने का कम छोड़  पार्टी के कार्यकर्ताओं  को ही आगे बढ़ने का मौका दें  वर्ना  आगे  तो राम ही राखें .  चुनाव मैनेजमेंट से नहीं मतदाता के मूड से जीता जाता है. यहाँ पन्ना प्रमुख का अंकगणित नहीं  मतदाता की केमेस्ट्री  कम करती है . मजपा केमेस्ट्री छोड़ गणित लगाने लगी और प्लस माइनस के फेर फेर में एक किला गवां बैठी  क्योंकि गणित के फार्मूले से केमेस्ट्री बिगड़ गई और रिएक्शन में  भाजपा लगभग दिल्ली गवां बैठी है   हालाँकि अंतिम परिणाम १० को आएंगे  पर एग्जिट पोल कुछ संकेत तो छोड़ ही गएँ हैं . अब कजरी भाई क्या करेंगे  और कितना करेंगे यह तो समय बताएगा  पर  अब टीम भाजपा के पास  पुरे देश में अपनी साख बचने की चिंता रहेगी . कजरी भाई के प्रचार के बाद हर जगह जनता पूछेगी मेरे खाते में १५ लाख कब तक आएंगे . अगर जनधन योजना के तहत खता खोलने के समय यह स्पष्ट कर दिया जाता कि इस खाते में इस तरह का कोई पैसा नहीं आएगा . लेकिन भाजपा और इसके नेताओं की एक गलती के कारण  आम आदमी पार्टी यह साबित करने में सफल रही की मोदी अपना वादा पूरा नहीं कर रहें हैं और यही गणित हैं जहाँ शाह और उनकी टीम फ़ैल होती दिखी . रही सही कसार दिल्ली चुनाव से दो दिन पूर्व अमित शाह ने टीवी  साक्षात्कार  काले धन को खाते में डाले जाने वाले प्रश्न को  चुनावी जूमला करार मोदी की केमेस्ट्री की ऐसी तैसी कर दी .