गुरुवार, 10 मार्च 2022

भाजपा अपने राज बचाने में सफल कांग्रेस की दुर्दशा

 आज पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आ गए। इनमें से उत्तर प्रदेश समेत 4 राज्यों को बचाने में भाजपा सफल रही है । पंजाब की जनता ने अलग खिचड़ी पकाई है और दिल खोल कर आम आदमी पार्टी को अपना समर्थन दिया है । वैसे तो राजनीतिक पंडित इन चुनावों में भाजपा के पक्ष में परिणाम को लेकर संशय में थे। उनका मानना था की के 4 राज्यों में एंटी इनकंबेंसी फैक्टर के कारण भाजपा को हार का रुख देखना पड़ सकता है। कोरोना काल की दुश्वारियां, बढ़ती बेरोजगारी आदि को केंद्र में रखकर राजनीतिक पंडित और पत्रकार इस तरह की राय रख रहे थे । लेकिन चुनाव परिणामों ने यह साबित किया देश में कमोबेश हर राज्य में मोदी का करिश्मा अभी बरकरार है । हालांकि कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने मोदी की सभाओं में कम भीड़ को भाजपा के क्षरण का पैमाना बताना शुरू कर दिया था। लेकिन चुनाव परिणामों ने उनकी इन आशंकाओं को पूर्ण रूप से गलत साबित किया। सबसे पहले बात करते हैं उत्तर प्रदेश की यहां चुनाव की घोषणा से पूर्व ही लोग सपा को मुख्य संघर्ष वाली पार्टी मानकर चल रहे थे। दावा तो यहां तक किया जा रहा था की उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी। इसके पीछे युवाओं का आक्रोश , ब्राह्मणों की भाजपा से नाराजगी और भाजपा में रहे कुछ ओबीसी नेताओं का पार्टी छोड़कर सपा में शामिल होने को कारण बताया जा रहा था। शुरुआत में अखिलेश यादव और उनकी टीम जमीनी स्तर पर लड़ाई में दिखने भी लगी थी। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक कौशल और प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी का चेहरा और उनकी रणनीति सपा और गठजोड़ पर भारी पड़ी। अखिलेश यादव 2017 के भाजपा के ही प्रयोग को दोहरा कर उसे मात देना चाह रहे थे । लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाए,  हालांकि उनकी सीटें पिछले चुनाव के मुकाबले दोगुनी से अधिक जरूर हो गईं । इसके पीछे उनकी मेहनत कम और वर्तमान सरकार से नाराजगी का बड़ा हाथ रहा है । कुल मिलाकर जमीनी स्तर पर सुरक्षा का वातावरण कोरोना काल की दुश्वारियां से जूझ रहे गरीबों को मुफ्त राशन, ग्रामीण इलाकों में लोगों को पक्का मकान, उज्जवला योजना में गैस का चूल्हा, किसान निधि, श्रम सम्मान आदि एंटी इनकंबेंसी पर भारी पड़ा।  लगभग ढाई दशक बाद एक बार फिर भाजपा ने प्रदेश में जीत रखकर एक इतिहास रच दिया । इसके साथ ही ऐन चुनाव से ठीक पहले कृषि कानूनों की घोषणा भी भाजपा के लिए एक मास्टर स्ट्रोक साबित हुई। इस घोषणा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा और रालोद की धार को काफी हद तक कुंद कर दिया । रही सही कसर अखिलेश यादव और उनके साथियों के चुनावी कुबोल ने पूरा कर दिया।

 अब बात करते हैं उत्तराखंड की यहां चुनाव से 6 महीने पहले ही मुख्यमंत्री बनाए गए पुष्कर सिंह धामी अपना चुनाव जरूर हार गए पर उन्होंने पार्टी की संभावित हार को टालकर उत्तराखंड में भी दोबारा किसी एक दल की सरकार बनाने का बड़ा काम कर दिखाया। । हालांकि यहां भी मोदी का चेहरा ही भाजपा के सबसे अधिक काम आया। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी की जबरदस्त घेरेबंदी के बावजूद भारतीय जनता पार्टी इस प्रदेश में पूर्ण बहुमत से दोबारा सरकार बनाने में सफल रही है।  मणिपुर में भी दूसरे दूसरे दलों के दावों को झुठलाते हुए भाजपा लगातार दूसरी बार सरकार बनाने में सफल रही है तो गोवा में भी विपक्ष के की जबरदस्त घेराबंदी के बावजूद भाजपा बहुमत के आंकड़े के आसपस पहुंच गई और इस प्रदेश में भी वह सरकार बना लेगी। इस तरह भाजपा ने अपने नेतृत्व वाले चार राज्य इन चुनाव में एक बार फिर बचा लिए । रही बात पंजाब की तो यहां कांग्रेस का अंतरकलह ,भाजपा अकाली दल का अलग होना, किसान आंदोलन का प्रभावी होना कांग्रेस अकली दल और भाजपा के लिए हार का कारण बना और आम आदमी पार्टी कि लोकलुभावन घोषणाएं घोषणा होने माउस की वहां उसकी जमीन तैयार की और उसकी झोली प्रचंड बहुमत से भर दिया सिद्धू का रवैया कांग्रेश के लिए काल मना सिद्धू तो चुनाव हारे कांग्रेस की लुटिया डुबो बैठे। यही आम आदमी पार्टी की इस प्रचंड लहर में लंबी श्री प्रकाश सिंह बादल को भी हार का सामना करना पड़ा। अब देखना यह है कि इस प्रचंड बहुमत को आम आदमी पार्टी आम आदमी पार्टी किस तरह से बचा कर रख पाती है और पंजाब को नशा बेरोजगारी और आतंक से मुक्त कर सकती है।

बुधवार, 2 मार्च 2022

आएंगे तो योगी ही

 चुनाव के पांच चरण समाप्त हो चुके हैं । कल यानी आज सुबह छठ में चरण का मतदान होना है।  बड़े बड़े बड़े राजनीतिक  पंडित और नामी-गिरामी पत्रकार इस चुनाव पर अपना अपना पक्ष किसी न किसी माध्यम से रख रहे हैं। एक पत्रकार के तौर पर मेरा आकलन यह कहता है की उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भाजपा की ही सरकार बनेगी । हालांकि मुकाबला फिलहाल एक तरफा नहीं दिख रहा है। लेकिन यह तय है की भारतीय जनता पार्टी किसी भी हाल में 240 सीटों से कम पर नहीं रहेगी। यदि कानून व्यवस्था और दो वितरण ध्रुवीकरण का मंत्र काम कर गया तो भाजपा 2017 भी दोहरा सकती है । हालांकि विपक्ष जाने समाजवादी पार्टी राज्य में चुनाव के बाद अपनी सरकार बनाने का दावा काम तो कर कर रही है इसके पीछे सपा के पक्ष में मुस्लिम बिरादरी का आना एक बड़ा कारण माना जा रहा है। लेकिन उनकी एकजुटता भाजपा के लिए बहुमत का साधन बन सकती है पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों की नाराजगी और जाट मुस्लिम एकता के कारण भाजपा को पिछले चुनाव के मुकाबले कुछ घाटा हो सकता है। लेकिन उतना नहीं जितना विशेषज्ञ बता रहे हैं। दो चरणों तक सपा भाजपा के बराबर या उसे आगे रहने में सफल रही है पर तीसरे चरण के बाद भाजपा ने बढ़त हासिल शुरू की और यह बढ़त सातवें चरण तक भाजपा के पास ही रहेगी। 2017 के चुनाव में भाजपा प्रदेश में शिखर पर थी इसलिए यह तो तय है की वह वहां से कुछ नीचे आएगी ।अगर प्रदेश के युवाओं ने रोजगार की बात को लेकर सपा का साथ दिया तो भाजपा की सीटें वास्तव में कम हो सकती हैं । लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इस बार भाजपा दूसरे दलों के मुकाबले बढ़त पर दिख रही है। केवल मुस्लिम और यादों के बल पर सभा सपा किसी भी कीमत पर बहुमत नहीं पा सकती। भाजपा से टूट कर सपा में पहुंचे कई नेता तो अपनी सीट भी बचा पाएंगे या नहीं यह भविष्य के गर्भ में है।