चुनाव के पांच चरण समाप्त हो चुके हैं । कल यानी आज सुबह छठ में चरण का मतदान होना है। बड़े बड़े बड़े राजनीतिक पंडित और नामी-गिरामी पत्रकार इस चुनाव पर अपना अपना पक्ष किसी न किसी माध्यम से रख रहे हैं। एक पत्रकार के तौर पर मेरा आकलन यह कहता है की उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भाजपा की ही सरकार बनेगी । हालांकि मुकाबला फिलहाल एक तरफा नहीं दिख रहा है। लेकिन यह तय है की भारतीय जनता पार्टी किसी भी हाल में 240 सीटों से कम पर नहीं रहेगी। यदि कानून व्यवस्था और दो वितरण ध्रुवीकरण का मंत्र काम कर गया तो भाजपा 2017 भी दोहरा सकती है । हालांकि विपक्ष जाने समाजवादी पार्टी राज्य में चुनाव के बाद अपनी सरकार बनाने का दावा काम तो कर कर रही है इसके पीछे सपा के पक्ष में मुस्लिम बिरादरी का आना एक बड़ा कारण माना जा रहा है। लेकिन उनकी एकजुटता भाजपा के लिए बहुमत का साधन बन सकती है पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों की नाराजगी और जाट मुस्लिम एकता के कारण भाजपा को पिछले चुनाव के मुकाबले कुछ घाटा हो सकता है। लेकिन उतना नहीं जितना विशेषज्ञ बता रहे हैं। दो चरणों तक सपा भाजपा के बराबर या उसे आगे रहने में सफल रही है पर तीसरे चरण के बाद भाजपा ने बढ़त हासिल शुरू की और यह बढ़त सातवें चरण तक भाजपा के पास ही रहेगी। 2017 के चुनाव में भाजपा प्रदेश में शिखर पर थी इसलिए यह तो तय है की वह वहां से कुछ नीचे आएगी ।अगर प्रदेश के युवाओं ने रोजगार की बात को लेकर सपा का साथ दिया तो भाजपा की सीटें वास्तव में कम हो सकती हैं । लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इस बार भाजपा दूसरे दलों के मुकाबले बढ़त पर दिख रही है। केवल मुस्लिम और यादों के बल पर सभा सपा किसी भी कीमत पर बहुमत नहीं पा सकती। भाजपा से टूट कर सपा में पहुंचे कई नेता तो अपनी सीट भी बचा पाएंगे या नहीं यह भविष्य के गर्भ में है।
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