रविवार, 6 जुलाई 2008

घड़ी घड़ी: निंदा केवल एक पक्ष की ही क्यों#links

इक सच यह भी #links

भोले बाबा बर्फानी · के दर्शनों के लिए अमरनाथ यात्रा पर गए शिवभक्तों ने दशहत भरे माहौल में पवित्र गुफा में बने शिवलिंग के दर्शन ·किए का श्मीरी कट्टरपंथियों ने चंदनबाड़ी में यात्रियों पर लाठियां बरसाने के अलावा जमक र पथराव किया और उनके वाहन तोड़ डाले। घोड़े वालों ने भी इसका फायदा उठाते हुए यात्रियों से मुंह मांगे पैसे वसूले। जम्मू-·श्मीर में माहौल खराब होने की सूचना मिलते ही यात्रियों में भगदड़ मच गई। बालटाल में ठहरे यात्रियों को श्रीनगर से होकर गुजरना था, जबकी sarkari बसें बालटाल नहीं पहुंच रही थी। प्राइवेट बस वालों ने भी बहती गंगा में हाथ धोया और यात्रियों ·ो श्रीनगर पहुंचाने ·े नाम जम·र लूट खसोट ·ी। इसमें छोटी गाड़ी जीप, सूमो वाले भी पीछे नहीं रहे। वे बालटाल से श्रीनगर जाने ·ा दस हजार रुपये वसूल रहे थे। ·ई बच्चे अपने मां-बाप से बिछड़ गए।बालटाल से श्रीनगर त· जाने ·े लिए लोगों में भगदड़ मच गई, क्यों·ि ·ई यात्री चार दिन से बालटाल में फंसे हुए थे। यात्रियों ·ो बस ·ी छतों में चढ़·र जाना पड़ा। श्रीनगर पहुंचते ही जम्मू और पहलगाम त· बसें नहीं जा रही थी। ए·-दो प्राइवेट बसें पहलगाम जाने ·ो तैयार हुई, जिन्होंने ५५ रुपये ·ी जगह पर तीन सौ रुपये वसूला। श्रीनगर बस स्टैंड पर तैनात जम्मू-·श्मीर पुलिस ने भी यात्रियों ·ो खूब लूटा। यात्रियों से अधि· पैसे ले·र बसों पर बैठाना शुरू ·र दिया। यात्री इतने डरे हुए थे ·ि वह मुंह पैसा मांगा देने ·ो तैयार थे। उपद्रवियों ने यात्रियों ·े चल रहे वाहनों ·ो रो··र शीशे तोड़ डाले और यात्रियों पर जम·र पथराव ·िया। हनुमानगढ़ ·ी बस पर पथराव होने से बस अनियंत्रित हो·र बिजली ·े खंभे से जा ट·राई, जिसमें बस चाल· ·ी मौत हो गई और पचास यात्री जख्मी हो गए। श्रीनगर ·ी सड़· पर बिखरे ·ांच पर शिव भक्तों ·ी बसें दौड़ रही थीं। यात्रियों में दहशत थी, क्यों·ि श्रीनगर ·े जिस गांव से यात्रियों ·ी बसें गुजर रही थी, वहीं पर वाहनों ·े शीशे तोडऩे ·ा सिलसिला जारी था। इतना ही नहीं जेएंड·े पुलिस ·े ·ई मुलाजिमों ने भी माहौल ·ा फायदा उठाते हुए शिवभक्तों ·े वाहनों ·ो निशाना बना डाला और जम·र तोडफ़ोड़ ·ी। श्रीनगर ·े गांव गुनंड में फिरोजपुर ·े सात यात्रियों ·ो श्रीनगर ले·र जा रही सूमो ·ो रो··र उपद्रवियों ने शीशे तोड़ डाले और आग लगा दी। यात्रियों पर भी लाठियां बरसाईं। उपद्रवियों ने पा·िस्तान जिंदाबाद ·े नारे लगाए। और तो और यात्रियों से भी पा·िस्तान जिंदाबाद ·े नारे लगाने ·ो ·हा। जिस यात्री ने नारे नहीं लगाए, उन·ी जम·र पिटाई ·ी गई। वहीं, पुलिस भी लोगों पर लाठियां बरसाने में लगी हुई थी। इस भगदड़ में परिवार ·े साथ आए बच्चे व अन्य सदस्य बिछड़ गए। हर तरफ लोगों ·े रोने और चीखने ·ी आवाजें सुनाई दे रही थीं। ·ई बिछुड़े हुए बच्चे व अन्य सदस्य श्रीनगर ·ी डल झील पर मिले, जो अपने परिजनों ·े नहीं मिलने पर फूट-फूट ·र रो रहे थे।

amarujala se sabhar

निंदा केवल एक पक्ष की ही क्यों

कई दिनों से विभिन्न अखबारों और ब्लॉगों पर अमरनाथ बोर्ड को दी गई जमीन और उसके बाद उत्तपन्न स्थितियों पर विद्वत्जनों के विचार पढ़ने को मिल रहें हैं। अधिकतम आलेखों और टिपनियों में धर्मनिरपेक्षता का लबादा ओढ़ कर भाई लोग संघियों को गरियाते फिर रहें हैं। भाई गरियाइए क्योंकि आपकी अभिब्यक्ति की स्वंत्रता पर उंगली उठा कर पाप का भागी नहीं बनना चाहता हूँ । फिर भी भाई लोग इतना तो ध्यान रखिये की यह गरियाना इकतरफा न हो । यह ठीक है की भारत जैसे विविधताओं वाले देश में किसी एक मुद्दे को लेकर पुरे देश में बवाल मचाया जाय । पर इंदौर की घटना का जिक्र करते समय कश्मीर के Bअल ताल और अन्य जगहों पर हुई घटनाओं कस भी जिक्र किया जाय। ख़ुद कोई निष्कर्ष न निकाल कर कुछ चीजो का जिम्मा पाठकों पर भी छोड़ा जाना चाहिए। भाई आप अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र हैं पर केवल विचारधारा के नाम पर बिना किसी प्रमाण के किसी को गरियाना उचित प्रतीत नहीं होता। कहते भी हैं की ताली केवल एक हाथ से नही बजती है । इसके लिए कहीं न कहीं दुसरे हाथ का भी लगना जरूरी होता है। सो हे भाई गरिअइये पर केवल एक को नही। सच को छुपाइये नहीं लेकिन जो सच है उसे सच कहने की हिम्मत तो जुटाइये । ।

मंगलवार, 8 अप्रैल 2008

त्याग का एक और कांग्रेसी पैंतरा

अभी हाल में ही मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कांग्रेसी त्याग की एक और परम्परा का एक और पैंतरा सामने आया । विस्तार के तुरंत बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने यह कह कर सबको चौंका दियाकि मैं राहुल को मंत्री बनाना चाहती थी पर उनहोंने इंकार कर दिया । इस बयान को कांग्रेसी एक और त्याग की मिशाल बताते नहीं थक रहें हैं । अब किसी को यह बताने की तरुरत नहीं है कि कांग्रेस में सोनिया की बात अन्तिम होती है । ऐसे में यह भी बात उभर कर आती है कि क्या अब सोनिया के बच्चे ही उनकी बात को नजरंदाज कर रहें हैं। अगर ऐसी बात है तो इसका मतलब यह हुआ कि कांग्रेस में अब सोनिया की कम चलती है और उनके अपने ही उनकी बात नहीं मानते हैं । और यदि अगर ऐसा नहीं है तो फ़िर त्याग की बात बेमानी है । महंगाई और विभिन्न मुद्दों पर घिरी सरकार को बचने के लिए कांग्रेस त्याग का एक और नाटक खेल रही है और इसके केन्द्र बिन्दु में कांग्रेस के युवराज को रखा गया गई ताकि चुनावों में इसे भुनाया जा सके।

बुधवार, 2 अप्रैल 2008

कुछ भी काम न आया

पहले रेल बजट और फ़िर आम बजट में ढेरों रियायतें देकर वाहवाही बटोरने वाली संप्रग सरकार के लिए अब महंगाई गले की हड्डी बन गई है । अब न टू सरकार को इसे उगलते बन रहा है न ही निगलते। मंत्री स्तर से लेकर अफसरों के स्तर पर हर प्रयास किए जा रहें हैं । बावजूद इसके महंगाई सुरसा की तरह मुहँ बढाए ही जा रही है। सरकार को तो बजट के बाद चुनावों में बाजी अपने हाथ लगती नजर आ जाही थी। लेकिन बुरा हो इस महंगाई का जिसने सब कुछ गुड गोबर कर दिया चौथी पीढ़ी के राजकुमार को सत्ता सौंपने की त्येयारी धरी की धरी रह गई । दरबारी जन इस कमर तोड़ महंगाई को रोकने के लिए पूरे जी जान से लगे हुए हैं। जब कोई तरकीब काम नहीं आई तो दोष विदेशी सरकारों पर देना सुरु कर दिया गया । पर सरकार और उसके कारिंदे कुछ भी कर लें जनता को बहुत दिनों तक बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए भारत के हर राजनीतिक दल को सबसे पहले आम आदमी , किसान और किसानी के बरे मी सोचना होगा । ऐसा नहीं करने वाले को हर हाल देश की देसी जनता का कोपभाजन बनाना होगा। किसानों के इस देश में उद्योगों के साथ साथ किसानों की बात करनी भी जरूरी होगी ।

मंगलवार, 12 फ़रवरी 2008

मुम्बई का बवाल

बवाल बढ़ गया है । आमची मुम्बई तुमची नाइ का नारा एक बार फिर बुलंद हो गया है । जिन्होंने इस मायानगरी मे पीढ़ी गुजार दी वे अब कहाँ जाएँ । ठाकरे कुनबा मिलजुल कर इन लोगों को धमकाने मे जुटा है कि भाग जाओ warna भगा दिए जाओगे । ऐसा जैसे मुम्बई इस परिवार की खानदानी सम्पत्ति का एक हिस्सा हो। ऐसा नहीं है कि केवल मराठा प्रेम के कारन ये ऐसा कर रहें हैं । चाचा भतीजे की लड़ाई एक साल पहले मतोश्री से निकल कर पहले मुम्बई की सड़कों पर आई और जब भतीजा इसमे पिछड़ने लगा तो उसने तीसरे पक्ष को निशाना बनाना शुरू कर दिया । जबाबी कारर्वाई मे चाचा का बेटा भी कूद पड़ा । मामला गरमाता गया और जिनपर लोगों की रक्षा का भार था वे ही ऐसे लोगो को संरक्षण देने लगे , कारन भय था या फिर राजनीती या फिर कुछ और यह तो वही लोग बता सकते हैं । सबसे शर्मनाक काम तो सरकार ने किया और ठाकरे को खुल्ला छोड़ तमाशा देखती रही । भुगतने वाले भुगतें अपनी बाला से जब चुनाव आयेगा तब वोट तो हमें ही देंगें । क्योंकि मराठा मार का बदला तो उत्तर भारत के लोग मजबूरी मे वोट हमें देंगें ही। चुनावी फसल काट लेने के बाद देखा जाएगा कि मामला कैसे निपटाया जाए ।

शुक्रवार, 11 जनवरी 2008

नारायण मूर्ति और हम

नतो चेहरे पर प्रसिद्धि का दंभ न ही बड़ा होने का अभिमान । ऐसा लगा जैसे हम उनसे मिलने नहीं गए थे बल्कि वी ही हमसे मिलने आयें हों । सहजता ऐसी कि पास आकर बैठते ही बोल पड़े भाई मेरा हिन्दी ग्रामर थोडा ठीक नहीं है , मैं हिन्दी समझ लूंगा पर बोलूँगा अंग्रेजी में ही। यही सहजता नारायण मूर्ति को हमसे , आपसे और आम आदमी से अलग करती है। बुलंदी की हर ऊंचाई पर करने के बाद भी नारायण मूर्ति की यह अदा हम लोगों को भा गई। दो दिन पहले प्रताप जी ने श्री मूर्ति से मिलने जाने की बात हमलोगों से बताई थी। आई आई टी कानपुर परिसर पहुँचने के थोडी के बाद आई आई टी कानपुर के कुछ adhikaariyon के साथ एक मुस्कुराता चेहरा हम लोगों के बीच था । जैसे ही प्रताप जी ने कहा मूर्ति साहब आपसे मिलने का एक सपना था जो मुद्दतों बाद पूरा हुआ इस पर नारायण मूर्ति ने जोर का ठहाका लगाया और कहा , इट्स माय प्लेजर । फिर उनसे अनौपचारिक बातें होतीं रही । खेल से लेकर दुनियादारी तक हर बात को उन्होने एक शिक्षक कि तरह समझया। बिना किसी लाग लपेट के कहा मैं अच्छा नही निष्पक्ष आदमी बनने मी विस्वास करता हूँ क्योंकि इससे हर समस्या का समाधान हो सकता है। उनहोंने साफ कहा निष्पक्षता से ही ख़ुशी पाई जा सकती है। जीवन का एक और मूलमंत्र उनहोंने बताया और कहा अपनी कमियों को दूर कर लीजिये हर क्षेत्र में आपको सफलता मिलेगी। गाँधी के अनन्य प्रशंसक श्री मूर्ति के अनुसार गाँधी बनिए आपको सम्मान खुदबखुद मिलेगा । सत्ता हमेशा आदमी को संकीर्ण बनती है। गाँधी के पास सत्ता का कोई पद नहीं था पर देश केलोगों का प्यार उनके पास था । इसी प्यार ने उनको महान बनाया । बातें ख़त्म हुईं और हम चलने को तैयार हुए श्री मूर्ति को भी लखनऊ निकलने कि जल्दी थी तभी उनकी नजर टेबल पर रक्खे काफी के कपों पर पड़ी और वह बोल पड़े अरे ह्वाट अबाउट काफ़ी और फिर एक कप उठाकर हमलोगों से कहा लेट अस फिनिश .

गुरुवार, 10 जनवरी 2008

घड़ी घडी क्यों

मैं bloging कि दुनिया में एकदम नया हूँ । मान लीजिये कि मैंने इस स्कूल की नर्सरी में प्रवेश लिया है । हालांकि कम्प्यूटर की दुनिया मेरे लिए ने नहीं है । जब कुरता पायजामा पहनता था तब भी कंप्यूटर के बारे में अपने समय के लोगों से अधिक जानता था । मैंने केवल कंप्यूटर पढ़ ही नही वरना पढाया भी । इसीलिए जबसे ब्लोगिंग के बारे में सुना इच्छा होती थी कि मैं भी अपना एक ब्लोग बनाऊं परन्तु काम की दुश्वारियों और समय के जबरन अभाव के कारण ऐसा नहीं कर पा रहा था । हाँ एक बात जरूर थी कि हर रोज दो चार ब्लोगों से रूबरू जरूर हो लेता था । इन्हीं की अछ्छाइयों और कुछ कमियों ने मुझे ब्लोगर बनने पर मजबूर कर दिया । अचानक एक दिन अपने संपादक प्रताप जी जो मुझे मित्रवत स्नेह देते हैं , से इसपर बात हुई और उनहोंने कहा तिवारी जी बनाइये और इसे गंभीर सूचनाओं के अदन प्रदान का एक अच्छा maadhyam बनाया जाएगा । बस क्या था मैं पिल पड़ा और हो गया ब्लोग का निर्माण । एक बार निर्णय लेने के बाद अपने सहयोगी सागर संजय पाटिल को इस काम में लगाया और एक अन्य सहयोगी शक्ति शर्मा की मदद से कुछ डिजाइन तैयार किया बाकी मदद प्रताप जी और मृतुन्जय ने की और मैं आपके सामने अपनी बात लेकर प्रस्तुत होने को तैयार हो गया । बस यही प्रयास होगा कि अपने बडों से जो शालीनता मिली है उसे इस ब्लोग के माध्यम से बरकरार रक्खा जाए । आज अभिब्यक्ति की आजादी के नाम पर जो कुछ किया जा रहा है वह मुझे रास नहीं अता । हो सकता है कई लोगों को यह बात पसंद न आये पर अपना भी एक अलग अंदाज है । कोशिश होगी कि इस ब्लोग में भी यह अंदाज बरकरार रहे ।
आपके सुझावों की प्रतीक्षा में
मनोज तिवारी बाबा