मंगलवार, 8 अप्रैल 2008

त्याग का एक और कांग्रेसी पैंतरा

अभी हाल में ही मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कांग्रेसी त्याग की एक और परम्परा का एक और पैंतरा सामने आया । विस्तार के तुरंत बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने यह कह कर सबको चौंका दियाकि मैं राहुल को मंत्री बनाना चाहती थी पर उनहोंने इंकार कर दिया । इस बयान को कांग्रेसी एक और त्याग की मिशाल बताते नहीं थक रहें हैं । अब किसी को यह बताने की तरुरत नहीं है कि कांग्रेस में सोनिया की बात अन्तिम होती है । ऐसे में यह भी बात उभर कर आती है कि क्या अब सोनिया के बच्चे ही उनकी बात को नजरंदाज कर रहें हैं। अगर ऐसी बात है तो इसका मतलब यह हुआ कि कांग्रेस में अब सोनिया की कम चलती है और उनके अपने ही उनकी बात नहीं मानते हैं । और यदि अगर ऐसा नहीं है तो फ़िर त्याग की बात बेमानी है । महंगाई और विभिन्न मुद्दों पर घिरी सरकार को बचने के लिए कांग्रेस त्याग का एक और नाटक खेल रही है और इसके केन्द्र बिन्दु में कांग्रेस के युवराज को रखा गया गई ताकि चुनावों में इसे भुनाया जा सके।

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