रविवार, 6 जुलाई 2008

निंदा केवल एक पक्ष की ही क्यों

कई दिनों से विभिन्न अखबारों और ब्लॉगों पर अमरनाथ बोर्ड को दी गई जमीन और उसके बाद उत्तपन्न स्थितियों पर विद्वत्जनों के विचार पढ़ने को मिल रहें हैं। अधिकतम आलेखों और टिपनियों में धर्मनिरपेक्षता का लबादा ओढ़ कर भाई लोग संघियों को गरियाते फिर रहें हैं। भाई गरियाइए क्योंकि आपकी अभिब्यक्ति की स्वंत्रता पर उंगली उठा कर पाप का भागी नहीं बनना चाहता हूँ । फिर भी भाई लोग इतना तो ध्यान रखिये की यह गरियाना इकतरफा न हो । यह ठीक है की भारत जैसे विविधताओं वाले देश में किसी एक मुद्दे को लेकर पुरे देश में बवाल मचाया जाय । पर इंदौर की घटना का जिक्र करते समय कश्मीर के Bअल ताल और अन्य जगहों पर हुई घटनाओं कस भी जिक्र किया जाय। ख़ुद कोई निष्कर्ष न निकाल कर कुछ चीजो का जिम्मा पाठकों पर भी छोड़ा जाना चाहिए। भाई आप अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र हैं पर केवल विचारधारा के नाम पर बिना किसी प्रमाण के किसी को गरियाना उचित प्रतीत नहीं होता। कहते भी हैं की ताली केवल एक हाथ से नही बजती है । इसके लिए कहीं न कहीं दुसरे हाथ का भी लगना जरूरी होता है। सो हे भाई गरिअइये पर केवल एक को नही। सच को छुपाइये नहीं लेकिन जो सच है उसे सच कहने की हिम्मत तो जुटाइये । ।

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