शनिवार, 15 फ़रवरी 2014

48 दिनों में दिल्ली वालों को क्या मिला : बाबा जी का ठुल्लु

अरविन्द भाई ने कहा है हमारी सरकार  ने कम समय में जो काम कर दिखाया है वह कोई नहीं कर सकता।  बहुत सोचने के बाद लगा शायद कजरी सही कह रहें हैं।  कोई न सुने तो धरना पर बैठ जाओ।  अगर विरोधी है तो तुरंत जेब से एक कागज निकालो और मढ़  दो आरोप।  बाकी दिल्ली वाले भाइयों मार्च के बाद न ठीक से पानी मिल पायेगी न ही बिजली।  तब सब ताली बजा कर कहियेगा हमें क्या मिला बाबा जी का ठुल्लु। कजरी भाई तो झोला ले निकल पड़े हैं लोकसभा के लिए वोट और चंदा जुटाने  दिल्ली वाले अब लोकसभा चुनाव तक तो जाएँ भांड में।  लोकसभा में मोदी भाई का जादू नहीं चला तो  केजरी भाई कांग्रेस समेत सबकी पसंद बनेंगे  यह मानना  है टीम केजरी का।  यूज और थ्रो का पुराना नाता रहा है केजरी भाई का।  हर साथ देने वाले को लंगड़ी मर आगे बढ़ने में उस्ताद रहें हैं कजरी भाई।  सबसे तजा उदहारण तो अन्ना  दादा का है।  सबने देखा कैसे अन्ना का उपयोग कर आगे बढे और फिर उनको धकिया कर अपना एजेंडा पूरा करने लगे।  इनको वोट देने वाले दिल्ली वाले अब टॉप  रहें हैं।  न ठीक से पानी मिला न ही बिजली।  संविदा वाले ताकते रह गए।  वोट तो दे दिया पर इन्हें माया मिली ना राम।  क्या मिला बस बाबा जी का ठुल्लु। 

रण छोड ही नहीं झूठों का गैग है कजरी टीम

कजरी गैग 14  फ़रवरी को झूठ फैला कर या कहिये नाखून कटा कर शहीद बनने झाडू  लेकर पुरे देश में निकल पड़े  हैं।  अपने कथित झूठ कि बुनियाद हर बात में संविधान कि दुहाई देने वाले इस गैंग ने दिल्ली में सरकार  बनाते समय ही रख दी थी।  शुरुआत सरकार  बनाने के समय ही कर दी।  पहले कहा किसी कीमत पर कांग्रेस के साथ नहीं जायेंगे पर मौका तो चल पड़े 28  लोगों को लेकर सरकार  बनाने और विधान सभा में कहा कि मैंने कांग्रेस का समर्थन नहीं लिया।  पर विस्वास मत और अध्यक्ष के चुनाव में यह समर्थन खुल्लमखुल्ला  दिखा।  पर कजरी भाई दिल्ली वालों को मूर्ख  बनाते रहे कि हमने तो समर्थन नहीं लिया।  जिस लोकपाल पर सर्कार कुर्बान करने कि बात कजरी गैंग कह रही है वह तो भारत कि संसद ने पहले ही पास कर दिया है।  ऐसा लगता है कजरी ऐसे दही बेचने वाले की तरह हल्ला कर रहें है कि हमारी दही ठीक दूसरों कि खट्टी।
 रेगिस्तान में आंधी  आने पर शुतुरमुर्ग अपनी चोंच रेत  में छिपा  सोचता है  आंधी चली गयी।  या फिर टिटिहरी कि तरह पैर ऊपर उठा कर यह  सोच लिया की मैंने सारा आसमान अपने पैरों पर उठा लिया है। ठीक कुछ इसी तरह का व्यव्हार कजरी और कंपनी कर रही है।  झूठ को बार बार बोलो लोग एक दिन सच मैंने लगेंगे यह फार्मूला इस गैंग ने अपना लिया है।  इनके मन की बात करे तो ठीक पर जब बात इन्हें जंचती नहीं तो फिर इनके गण आपका मुहं नोच लेने को तैयार रहते हैं।  कांग्रेस , भाजपा को  सोशल मिडिया के दुरुपयोग का आरोप लगाने वाले  कजरी गैंग के लोग खुद किस तरह इसका दुरुपयोग कर रहें है यह देखा जा सकता है।  एनजीओ गंग की यह जमात कल से फिर देश भर में झोले में झाड़ू रख अपने विरोधियों को डरने निकल पड़ेंगे।  खुद को आम आदमी कहने वाले ये लोग कहीं से आम नहीं हैं।  दूसरे दलो से रैली के खर्च हिसाब पूछने वाले अपने खर्च कि बात पूछने पर कहते अहिं हमने तो इसे साईट पर दल दिया है आप जाकर देख लें। पूरी  टीम लोमड़ी से भी अधिक चालक है।  इनका मानना  है की झूठ बोलकर दिल्ली वालों को मुर्ख बनाया अब चलो पुरे देश को मुर्ख बनाते हैं।  शायद ये लोकतंत्र के उस सिद्धांत को मानते हैं जिसमे इसका मजाक उड़ाते हुए कहा गया है कि लोकतंत्र मूर्खों का मूर्खों के लिए मूर्खों द्वारा किया जेन वाला शासन है।  अब कल से ये रोज एक झूठ बोलेंगे और आगे बढ़ जायेंगे जब साबुत माँगा जायेगा तो कहेंगे अब तुम साबित करो कि हमने झूठ बोला है।  

शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014

अरे ये तो भगौड़ा निकला

सड़कों पर आंदोलन करते करते सत्ता की  कुर्सी पाने वाला तथाकथित प्रगतिशील और  खुद  को आम आदमी का सबसे बेहतरीन रक्षक बताने वाला भाई अ ऐ के तो भगौड़ा  निकला।  देश- संविधान के लिया अपनी जन कुर्बान करने कि बात करने वाला तो 14  फ़रवरी को विधान सभा में बाकई वर्षो से स्थापित दलों के नेताओं का बाप निकला।  बिना प्रक्रियाओं का पालन किये अपने मनपसंद बिल को पास करने कि जिद पर अड़ा  रहा और जब बात नहीं बनी तो दूसरों को एक बार  बता शहीद होने निकल पड़ा।   यह ठीक है कि जंग और मोहब्बत में सब कुछ जायज है और जो इन दोनों में जायज है वह राजनीती में भी जायज है।
 कहीं पे निगाहें और कहीं पे निशाना कि तर्ज पर केजरी ने एकलब्य कि तर्ज पर अंगूठा कटा कर खुद को स्वयंभू शहीद घोसित कर बरसात में इसका जश्न  भी माना डाला .  कल से सम्भव है कल से शहादत को चोला ओढ़ कर पुरे देश में भोली जनता को अपनी पीठ का घाव दिखाते फिरें कि यह घाव कांग्रेस और भाजपा ने अम्बानी के साथ मिल कर दिया है।  हे देशवासियों अब आपका वोट ही इसपर मलहम लगाकर इसे ठीक कर सकता है।  बात बात पर संविधान कि बात करने वाले वाले केजरी एंड कंपनी के लोग दूसरों कि बात पर चिल्ला चिल्ला कर पूछने लगते हैं कि यह बात संविधान में कहाँ लिखी है।  समाज सुधरने निकले हो हर चीज लिखत पढ़त में ही देख कर करोगे तो फिर हर बार आज जो विधान सभा में हुआ वही  होगा .  भाई आप तो अपना पल्ला झाड़  कर चलते बने।  अब उनका क्या होगा जिन्होंने आप पर भरोसा किया।  आपको वोट केवल इसलिए नहीं मिला था कि जन लोकपाल बिल पास नहीं हुआ तो आप बाकि चीज पर बात ही नहीं करोगे।  जब आपको इस्तीफ़ा देना ही था तो आपने सरकार  क्यों बनाई।  उन नौजवानों , बेरोजगारों का क्या होगा जिन्होंने आप में आशा कि किरण देखी  थी।  उनके सपनों का क्या होगा जिन्हे केजरी एंड कंपनी ने जगाया था।  क्या वोट कि फसल कट कर उन्हें मझधार में छोड़ भाग जाना आपकी बहादुरी है।  बिजली पानी पर लोगों में जो आशा जगी थी उसका क्या होगा।  क्या आप कि टीम ने मैदान इसलिए छोड़ा कि आप ये वादे पुरे नहीं कर सकते थे।  लगता है आपको यह विश्वास हो चला था कि ये ऐसे लोकलुभावन वादे हैं जिन्हें पूरा करना मुश्किल  ही नहीं असम्भव है।  दूसरों को चोर कह कर कब तक लोगों कि नज़रों में बने रहिएगा।  अर्ध प्रदेश दिल्ली तो संभल नहीं पाये अब चलें हैं देश सँभालने का दवा करने।  केजरी भाई आपके परम मित्र है मनीष सिशोदिया आज विधान सभा में देख रहा था विपक्ष को ललकार रहे थे पूरा देश देख रहा है।  अरे भाई दिल्ली पूरा देश नहीं है यह बात आप लोगों को कब तक समझ में आएगी।  केवल टीवी कैमरो के बल पर बहुत दिन तक राजनीती नहीं कि जा सकती।  मेरा मन्ना है कि अगर विधान सभा में कैमरे नहीं होते तो आप और आपके साथी वैसी नौटंकी नहीं करते जैसी आज कर रहे थे।  जरा धरातल पर आइये और केवल बचन से नहीं वरन कर्म से भी ईमानदार बन्ने कि कोशिश कीजिये।  नहीं तो अगली बार भागने का भी मौका नहीं मिलेगा।  

रविवार, 2 फ़रवरी 2014

कब तक छलोगे मेरे भाई

आज लगभग एक साल बाद ब्लॉग खोला।  अखिलेश के फोन के बाद सोचा कुछ लिख ही दूं।  2 0 1 4  चुनाव सर पर हैं।  हर दल अपनी डफली अपना राग अलापने में लगा  है।  हर किसी को अपनी कमीज दूसरे के कमीज से अच्छी लग रही है।  अपनी कमीज का कालर  तो दीखता नहीं है पर दूसरे के कमीज कि कालर  हर कोई उलट उलट  कर देखने को बेक़रार है . वैसे आजकल हम भारत के लोग सोशल भी हो गए है. कोई फेसियता है तो कोई ट्विटियता है  पर बिना सर पैर के।  कहीं खड़े  होकर किसी को कुछ बोल दो  किसी कि दीवाल पर कुछ भी लिख दो . जिसको मिर्ची लगती है वह चिचियाने लगता है और बाकी  मौज लेते हैं।  ज्यादा मौज लेना हो तो उसे अगरसरित कर और मौज ले लियय जाता है।  न तो किसी के मान  से मतलब नहीं किसी के मर्यादा से।  हाँ जब बात अपने पर आती  है तो हर चीज गलत दिखने लगती है . गांधी जी ने कहा था बुरा मत सुनो, बुरा मत देखो।   बुरा मत बोलो।  हम  सब इसे  मानते तो हैं पर पहला  अपने लिए और दू सरा  तीसरा दूसरों के लिए। अपने लिए बुराई सुनने को कोई तैयार नहीं है दूसरे कि बुराइ  देखने को हर कोई तैयार है  रही बोलने कि बात तो यह कहने कि जरूरत नहीं है।
 जहाँ देखिये हर कोई दूसरे पर पिला पडा है।  दूसरों के लिए हम कुंडली विशेषज्ञ हो गए हैं। दूसरों कि वंशावली लेकर हर कोई खड़ा है अपने बारे में पूछो तो टपक जबाब मिलता है आप कौन होते हैं हमारे बारे में पूछने वाले।  बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां सुभान अल्ला।  बस हैम और आप दिल थम कर बैठें और चुनाव संपन्न होने तक सबकी हकीकत से दूसरों के माध्यम से रु ब रु होते रहें। मतदाता हैं हम  कोई कुछ भी कहे हमेशा  छाला जाना ही हम लोगों के भाग्य में बदा है।  हर कोई चुनाव पूर्व वादा करता है।  निभाने कि कसम  भी खता है पर जब निभाने का वक्त आता है तब  वह हम  लोगों को नियम कानून बताने लगता है।  अरे भाई  जब नियम कानून ही बताना था तो फिर नियम पढ  कर वादा किया होता।  हे गण  के पतियों कब तक हैम यूँ ही छले जाते रहेंगे।
  
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