सड़कों पर आंदोलन करते करते सत्ता की कुर्सी पाने वाला तथाकथित प्रगतिशील और खुद को आम आदमी का सबसे बेहतरीन रक्षक बताने वाला भाई अ ऐ के तो भगौड़ा निकला। देश- संविधान के लिया अपनी जन कुर्बान करने कि बात करने वाला तो 14 फ़रवरी को विधान सभा में बाकई वर्षो से स्थापित दलों के नेताओं का बाप निकला। बिना प्रक्रियाओं का पालन किये अपने मनपसंद बिल को पास करने कि जिद पर अड़ा रहा और जब बात नहीं बनी तो दूसरों को एक बार बता शहीद होने निकल पड़ा। यह ठीक है कि जंग और मोहब्बत में सब कुछ जायज है और जो इन दोनों में जायज है वह राजनीती में भी जायज है।
कहीं पे निगाहें और कहीं पे निशाना कि तर्ज पर केजरी ने एकलब्य कि तर्ज पर अंगूठा कटा कर खुद को स्वयंभू शहीद घोसित कर बरसात में इसका जश्न भी माना डाला . कल से सम्भव है कल से शहादत को चोला ओढ़ कर पुरे देश में भोली जनता को अपनी पीठ का घाव दिखाते फिरें कि यह घाव कांग्रेस और भाजपा ने अम्बानी के साथ मिल कर दिया है। हे देशवासियों अब आपका वोट ही इसपर मलहम लगाकर इसे ठीक कर सकता है। बात बात पर संविधान कि बात करने वाले वाले केजरी एंड कंपनी के लोग दूसरों कि बात पर चिल्ला चिल्ला कर पूछने लगते हैं कि यह बात संविधान में कहाँ लिखी है। समाज सुधरने निकले हो हर चीज लिखत पढ़त में ही देख कर करोगे तो फिर हर बार आज जो विधान सभा में हुआ वही होगा . भाई आप तो अपना पल्ला झाड़ कर चलते बने। अब उनका क्या होगा जिन्होंने आप पर भरोसा किया। आपको वोट केवल इसलिए नहीं मिला था कि जन लोकपाल बिल पास नहीं हुआ तो आप बाकि चीज पर बात ही नहीं करोगे। जब आपको इस्तीफ़ा देना ही था तो आपने सरकार क्यों बनाई। उन नौजवानों , बेरोजगारों का क्या होगा जिन्होंने आप में आशा कि किरण देखी थी। उनके सपनों का क्या होगा जिन्हे केजरी एंड कंपनी ने जगाया था। क्या वोट कि फसल कट कर उन्हें मझधार में छोड़ भाग जाना आपकी बहादुरी है। बिजली पानी पर लोगों में जो आशा जगी थी उसका क्या होगा। क्या आप कि टीम ने मैदान इसलिए छोड़ा कि आप ये वादे पुरे नहीं कर सकते थे। लगता है आपको यह विश्वास हो चला था कि ये ऐसे लोकलुभावन वादे हैं जिन्हें पूरा करना मुश्किल ही नहीं असम्भव है। दूसरों को चोर कह कर कब तक लोगों कि नज़रों में बने रहिएगा। अर्ध प्रदेश दिल्ली तो संभल नहीं पाये अब चलें हैं देश सँभालने का दवा करने। केजरी भाई आपके परम मित्र है मनीष सिशोदिया आज विधान सभा में देख रहा था विपक्ष को ललकार रहे थे पूरा देश देख रहा है। अरे भाई दिल्ली पूरा देश नहीं है यह बात आप लोगों को कब तक समझ में आएगी। केवल टीवी कैमरो के बल पर बहुत दिन तक राजनीती नहीं कि जा सकती। मेरा मन्ना है कि अगर विधान सभा में कैमरे नहीं होते तो आप और आपके साथी वैसी नौटंकी नहीं करते जैसी आज कर रहे थे। जरा धरातल पर आइये और केवल बचन से नहीं वरन कर्म से भी ईमानदार बन्ने कि कोशिश कीजिये। नहीं तो अगली बार भागने का भी मौका नहीं मिलेगा।
कहीं पे निगाहें और कहीं पे निशाना कि तर्ज पर केजरी ने एकलब्य कि तर्ज पर अंगूठा कटा कर खुद को स्वयंभू शहीद घोसित कर बरसात में इसका जश्न भी माना डाला . कल से सम्भव है कल से शहादत को चोला ओढ़ कर पुरे देश में भोली जनता को अपनी पीठ का घाव दिखाते फिरें कि यह घाव कांग्रेस और भाजपा ने अम्बानी के साथ मिल कर दिया है। हे देशवासियों अब आपका वोट ही इसपर मलहम लगाकर इसे ठीक कर सकता है। बात बात पर संविधान कि बात करने वाले वाले केजरी एंड कंपनी के लोग दूसरों कि बात पर चिल्ला चिल्ला कर पूछने लगते हैं कि यह बात संविधान में कहाँ लिखी है। समाज सुधरने निकले हो हर चीज लिखत पढ़त में ही देख कर करोगे तो फिर हर बार आज जो विधान सभा में हुआ वही होगा . भाई आप तो अपना पल्ला झाड़ कर चलते बने। अब उनका क्या होगा जिन्होंने आप पर भरोसा किया। आपको वोट केवल इसलिए नहीं मिला था कि जन लोकपाल बिल पास नहीं हुआ तो आप बाकि चीज पर बात ही नहीं करोगे। जब आपको इस्तीफ़ा देना ही था तो आपने सरकार क्यों बनाई। उन नौजवानों , बेरोजगारों का क्या होगा जिन्होंने आप में आशा कि किरण देखी थी। उनके सपनों का क्या होगा जिन्हे केजरी एंड कंपनी ने जगाया था। क्या वोट कि फसल कट कर उन्हें मझधार में छोड़ भाग जाना आपकी बहादुरी है। बिजली पानी पर लोगों में जो आशा जगी थी उसका क्या होगा। क्या आप कि टीम ने मैदान इसलिए छोड़ा कि आप ये वादे पुरे नहीं कर सकते थे। लगता है आपको यह विश्वास हो चला था कि ये ऐसे लोकलुभावन वादे हैं जिन्हें पूरा करना मुश्किल ही नहीं असम्भव है। दूसरों को चोर कह कर कब तक लोगों कि नज़रों में बने रहिएगा। अर्ध प्रदेश दिल्ली तो संभल नहीं पाये अब चलें हैं देश सँभालने का दवा करने। केजरी भाई आपके परम मित्र है मनीष सिशोदिया आज विधान सभा में देख रहा था विपक्ष को ललकार रहे थे पूरा देश देख रहा है। अरे भाई दिल्ली पूरा देश नहीं है यह बात आप लोगों को कब तक समझ में आएगी। केवल टीवी कैमरो के बल पर बहुत दिन तक राजनीती नहीं कि जा सकती। मेरा मन्ना है कि अगर विधान सभा में कैमरे नहीं होते तो आप और आपके साथी वैसी नौटंकी नहीं करते जैसी आज कर रहे थे। जरा धरातल पर आइये और केवल बचन से नहीं वरन कर्म से भी ईमानदार बन्ने कि कोशिश कीजिये। नहीं तो अगली बार भागने का भी मौका नहीं मिलेगा।


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