कजरी गैग 14 फ़रवरी को झूठ फैला कर या कहिये नाखून कटा कर शहीद बनने झाडू लेकर पुरे देश में निकल पड़े हैं। अपने कथित झूठ कि बुनियाद हर बात में संविधान कि दुहाई देने वाले इस गैंग ने दिल्ली में सरकार बनाते समय ही रख दी थी। शुरुआत सरकार बनाने के समय ही कर दी। पहले कहा किसी कीमत पर कांग्रेस के साथ नहीं जायेंगे पर मौका तो चल पड़े 28 लोगों को लेकर सरकार बनाने और विधान सभा में कहा कि मैंने कांग्रेस का समर्थन नहीं लिया। पर विस्वास मत और अध्यक्ष के चुनाव में यह समर्थन खुल्लमखुल्ला दिखा। पर कजरी भाई दिल्ली वालों को मूर्ख बनाते रहे कि हमने तो समर्थन नहीं लिया। जिस लोकपाल पर सर्कार कुर्बान करने कि बात कजरी गैंग कह रही है वह तो भारत कि संसद ने पहले ही पास कर दिया है। ऐसा लगता है कजरी ऐसे दही बेचने वाले की तरह हल्ला कर रहें है कि हमारी दही ठीक दूसरों कि खट्टी।
रेगिस्तान में आंधी आने पर शुतुरमुर्ग अपनी चोंच रेत में छिपा सोचता है आंधी चली गयी। या फिर टिटिहरी कि तरह पैर ऊपर उठा कर यह सोच लिया की मैंने सारा आसमान अपने पैरों पर उठा लिया है। ठीक कुछ इसी तरह का व्यव्हार कजरी और कंपनी कर रही है। झूठ को बार बार बोलो लोग एक दिन सच मैंने लगेंगे यह फार्मूला इस गैंग ने अपना लिया है। इनके मन की बात करे तो ठीक पर जब बात इन्हें जंचती नहीं तो फिर इनके गण आपका मुहं नोच लेने को तैयार रहते हैं। कांग्रेस , भाजपा को सोशल मिडिया के दुरुपयोग का आरोप लगाने वाले कजरी गैंग के लोग खुद किस तरह इसका दुरुपयोग कर रहें है यह देखा जा सकता है। एनजीओ गंग की यह जमात कल से फिर देश भर में झोले में झाड़ू रख अपने विरोधियों को डरने निकल पड़ेंगे। खुद को आम आदमी कहने वाले ये लोग कहीं से आम नहीं हैं। दूसरे दलो से रैली के खर्च हिसाब पूछने वाले अपने खर्च कि बात पूछने पर कहते अहिं हमने तो इसे साईट पर दल दिया है आप जाकर देख लें। पूरी टीम लोमड़ी से भी अधिक चालक है। इनका मानना है की झूठ बोलकर दिल्ली वालों को मुर्ख बनाया अब चलो पुरे देश को मुर्ख बनाते हैं। शायद ये लोकतंत्र के उस सिद्धांत को मानते हैं जिसमे इसका मजाक उड़ाते हुए कहा गया है कि लोकतंत्र मूर्खों का मूर्खों के लिए मूर्खों द्वारा किया जेन वाला शासन है। अब कल से ये रोज एक झूठ बोलेंगे और आगे बढ़ जायेंगे जब साबुत माँगा जायेगा तो कहेंगे अब तुम साबित करो कि हमने झूठ बोला है।
रेगिस्तान में आंधी आने पर शुतुरमुर्ग अपनी चोंच रेत में छिपा सोचता है आंधी चली गयी। या फिर टिटिहरी कि तरह पैर ऊपर उठा कर यह सोच लिया की मैंने सारा आसमान अपने पैरों पर उठा लिया है। ठीक कुछ इसी तरह का व्यव्हार कजरी और कंपनी कर रही है। झूठ को बार बार बोलो लोग एक दिन सच मैंने लगेंगे यह फार्मूला इस गैंग ने अपना लिया है। इनके मन की बात करे तो ठीक पर जब बात इन्हें जंचती नहीं तो फिर इनके गण आपका मुहं नोच लेने को तैयार रहते हैं। कांग्रेस , भाजपा को सोशल मिडिया के दुरुपयोग का आरोप लगाने वाले कजरी गैंग के लोग खुद किस तरह इसका दुरुपयोग कर रहें है यह देखा जा सकता है। एनजीओ गंग की यह जमात कल से फिर देश भर में झोले में झाड़ू रख अपने विरोधियों को डरने निकल पड़ेंगे। खुद को आम आदमी कहने वाले ये लोग कहीं से आम नहीं हैं। दूसरे दलो से रैली के खर्च हिसाब पूछने वाले अपने खर्च कि बात पूछने पर कहते अहिं हमने तो इसे साईट पर दल दिया है आप जाकर देख लें। पूरी टीम लोमड़ी से भी अधिक चालक है। इनका मानना है की झूठ बोलकर दिल्ली वालों को मुर्ख बनाया अब चलो पुरे देश को मुर्ख बनाते हैं। शायद ये लोकतंत्र के उस सिद्धांत को मानते हैं जिसमे इसका मजाक उड़ाते हुए कहा गया है कि लोकतंत्र मूर्खों का मूर्खों के लिए मूर्खों द्वारा किया जेन वाला शासन है। अब कल से ये रोज एक झूठ बोलेंगे और आगे बढ़ जायेंगे जब साबुत माँगा जायेगा तो कहेंगे अब तुम साबित करो कि हमने झूठ बोला है।


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें