मैं bloging कि दुनिया में एकदम नया हूँ । मान लीजिये कि मैंने इस स्कूल की नर्सरी में प्रवेश लिया है । हालांकि कम्प्यूटर की दुनिया मेरे लिए ने नहीं है । जब कुरता पायजामा पहनता था तब भी कंप्यूटर के बारे में अपने समय के लोगों से अधिक जानता था । मैंने केवल कंप्यूटर पढ़ ही नही वरना पढाया भी । इसीलिए जबसे ब्लोगिंग के बारे में सुना इच्छा होती थी कि मैं भी अपना एक ब्लोग बनाऊं परन्तु काम की दुश्वारियों और समय के जबरन अभाव के कारण ऐसा नहीं कर पा रहा था । हाँ एक बात जरूर थी कि हर रोज दो चार ब्लोगों से रूबरू जरूर हो लेता था । इन्हीं की अछ्छाइयों और कुछ कमियों ने मुझे ब्लोगर बनने पर मजबूर कर दिया । अचानक एक दिन अपने संपादक प्रताप जी जो मुझे मित्रवत स्नेह देते हैं , से इसपर बात हुई और उनहोंने कहा तिवारी जी बनाइये और इसे गंभीर सूचनाओं के अदन प्रदान का एक अच्छा maadhyam बनाया जाएगा । बस क्या था मैं पिल पड़ा और हो गया ब्लोग का निर्माण । एक बार निर्णय लेने के बाद अपने सहयोगी सागर संजय पाटिल को इस काम में लगाया और एक अन्य सहयोगी शक्ति शर्मा की मदद से कुछ डिजाइन तैयार किया बाकी मदद प्रताप जी और मृतुन्जय ने की और मैं आपके सामने अपनी बात लेकर प्रस्तुत होने को तैयार हो गया । बस यही प्रयास होगा कि अपने बडों से जो शालीनता मिली है उसे इस ब्लोग के माध्यम से बरकरार रक्खा जाए । आज अभिब्यक्ति की आजादी के नाम पर जो कुछ किया जा रहा है वह मुझे रास नहीं अता । हो सकता है कई लोगों को यह बात पसंद न आये पर अपना भी एक अलग अंदाज है । कोशिश होगी कि इस ब्लोग में भी यह अंदाज बरकरार रहे ।
आपके सुझावों की प्रतीक्षा में
मनोज तिवारी बाबा
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