शनिवार, 25 फ़रवरी 2017

परचम तो भाजप का ही लहराएगा


कल  यानी 27 फरवरी को यूपी चुनाव का पांचवां चरण समाप्त हो जायेगा। विद्वान लोग शोसल मीडिया पर अपनी- अपनी विद्वता लीक करने में लगे हैं। वैसे परिणाम तो 11 मार्च को आयेंगे और चुनावों के परिणाम की भविष्यवाणी करना अभी लाटरी के खेल की तरह है। स्तरहीन होती राजनीति ने इस कदर भरमा दिया है कि बड़े से बड़ा  विश्लेषक भी परिणाम के बारे में दावा करने की स्थिति में नहीं है।
फिर भी पांचवां चरण आते आते यह तय हो गया है कि प्रदेश में सबकी लड़ाई अब भाजपा से ही है। अखिलेश, माया, राहुल के मोदी पर तीखे शब्दबाण तो इसी ओर ईशारा करते हैँ। वैसे भी 2007 और 2012 के चुनावों में किसी एक दल को बहुमत न मिलने की बात हुई थी पर परिणामों ने सारे पूर्वानुमान उलट दिए थे। वैसे भी यह चुनाव पूरी तरह जातिय और धार्मिक रूप से गोलबंद होकर लड़ा जा रहा है। मुद्दों की बात पीछे चली गई है। विकास चुनावी अखाड़े में बौना हो गया है। लोगों की समस्यायें जातिय गोलंदी में समाप्त हो गईं हैं। हां एक बात जरूर है कि कानून व्यवस्था  और बिजली , पानी तथा सड़क कहीं ना कहीं मुद्दा जरूर है। इस गोलबंदी  और कुछ ज्वलंत मुद्दों का फायदा भाजपा को तेजी से िमल रहा है। यादव मतों को छोड़कर अन्य पिछड़ी जातियों का समर्थन भाजपा के लिए बरदान बनता जा रहा है। बसपा का साथ दे चुके ब्राह्मण् मत भी भाजपा की ओर लौट चुके हैं। यह भी साफ दिखने लगा है कि हर जगह दूसरे दल भाजपा से ही लड़ रहे हैं। टिकट बंटवरे के दौरान जिन्हें कमजोर माना जा रहा था वे भाजपा उम्मीदवार अब जीतने की स्थिति में आ गये हैं। सपा, बसपा और कोंग्रेस की हताशा यह चुगलखेरी करने लगी है कि इन दलों ने हार मान लिया है।
विभिन्न क्षेत्रों से मिले इनपुट के आधार पर मै 11 मार्च से पूर्व यह कहने की स्थिति में हूं कि इन चुनावों में यूपी में भाजपा को 250 से भी अधिक सीटें मिल जाएं तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। इसके साथ ही भाजपा का परचम उत्तराखंड और गोवा में भी लहराएगा। हां प्रजाब का परिणाम जरूर अलग हो सकता है। यहां कांग्रेस के सत्ता में आने की प्रबल संभावना है। हालांकि आम आदमी पार्टी का यहां बहुत कुछ दांव पर लगा है पर सिद्धू फैक्टर के कारण कांग्रेस उस पर भारी पड़ेगी। 

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