शनिवार, 13 जून 2009

कहाँ जायेगी भाजपा

२००९ आम चुनावों के बाद से ही देश के दो प्रमुख दल अपनी अपनी रणनीति बनाने में जुटें हैं । जीत से उत्साहित कांग्रेस अपने घर को और सुधारने के प्रयास में जी जान से जुट गई है तो दूसरी ओर बुरी तरह हार के बावजूद भाजपा के नेता अपना घर सुधरने के बावजूद आपस में धींगामुश्ती में जुटे परें हैं । किसी को जीत का इनाम चाहिए तो कोई हार के जिम्मेवार नेताओं को दण्डित करने की मांग कर रहा है। यह ठीक है कि पार्टी कि हर कि समीक्षा होनी चाहिए इसके लिए यदि कोई नेता जिम्मेवार है तो उसकी जिम्मेवारी भी तय कि जाय पर इसके लिए इतनी हाय तौबा मचने कि कोई जरूरत नहीं है । पार्टी नेत्रित्व पर उंगली उठाने वालों में एक मुरली मनोहर जोशी को छोड़ दिया जाय तो जो भी नेता हैं वे सब के सब भाजपा में बहार से आए हुए हैं । इनाम और दंड कि बात करने वाले यशवंत सिन्हा १९९१ में पटना लोकसभा से भाजपा के खिलाफ चुनाव लादे थे । तो जसवंत और अरुण शौरी को भाजपा अपने शाशनकाल में उचित इनाम दे चुकी है। यशवंत सिन्हा को भी भाजपा में आने का उचित इनाम भाजपा मंत्री बना कर दे चुकी है । ऐसा नहीं है कि भाजपा के नेता हार के कारणों कि समीक्षा आपस में मिल बैठ कर नहीं कर सकतें है । संगठन के बल पर चलने वाली पार्टियों में हार और जीत कि जिम्मेवारी किसी एक आदमी कि न होकर सामूहिक होती है । २००४ के चुनाओं में झारखण्ड में पार्टी कि हार के बाद यशवंत सिन्हा को इस जिम्मेवारी का ध्यान क्यों नहीं आया । यशवंत यदि यह सोचते हैं कि झारखण्ड में पार्टी कि शानदार जीत उनके कारन है तो यह उनकी गलतफहमी है । वहां पार्टी को जीत कार्यकर्ताओं कि मेहनत और दुसरे दलों में फूट kऐ कारण मिली । भाजपा कि यह लडाई किसी एक प्रदेश कि नहीं है सच तो यह है कि पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर कब्जे कि लडाई चल रही है । स्पस्ट रूप से दो खेमों में बंटी भाजपा में अगली पीढी के बीच सत्ता का संघर्ष शुरू हो चुका है । हर स्तर पर खेमेबंदी शुरू हो चुकी है । अपने अपने तर्कों से हर कोई दुसरे को घेरने में जुटा है । अपनी इस चिंता में पार्टी कि चिंता न तो यशवंत को हैं न ही जसवंत और अरुण शौरी को। पिछले पाँच सालों से निराश कार्यकर्ता और निराश हो चला है । उसकी चिंता बस इतनी है कि पार्टी बनी रहे । नेता तो आते जाते रहतें है पर संगठन बरक़रार रहता है। जिन्हें संगठन कि चिंता है वे बस यही देख रहें हैं कि भाजपा कहाँ जन रही है ।

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