बुधवार, 23 दिसंबर 2009

फिर नकारे गए नेता

कई चरणों में झारखण्ड क चुनाव निपटा अब आज उसका परिणाम भी आ गया । परिणाम के बाद नेताओं के बयानों से यही ध्वनी फूट रही गई की जनता ने हमे धोखा दे दिया । कोई भी नेता हर की जिम्मेवारी लेने को तैयार नहीं है । अगर खड़ा न खस्ता किसी एक दल को बहुमत मिल जाता तो उस दल के कार्यकर्ता (अब इन्हें दल्छोडुआ कहना गी उचित होगा क्योकि अब किसी दल में कार्यकर्ता तो हैं नहीं । चुनाव जितने वाले के साथ रहने वालों को कार्य करता नहीं कहा जाता है । ) अपने किसी न किसी न नेता को इस जीत क श्रेय जरूर देते । 'क्क्रिअती रुझान मिलते ही कांग्रेस दफ्तर में laddo बांटने लगे और प्रदेश प्रभारी केशव राव ने कहा यह तो कांग्रेस के युवराज राहुल के प्रयासों की जीत है। पर परिणाम आ जाने के बाद अब इस सम्बन्ध में कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। भाजपा की तो और बुरी स्थिति है । किसको श्रेय दें और किसपर दोषारोपण करें उसके नेता यह तय ही नहीं कर पा रहें हैं। मतलब साफ है नेताओं की कोई क्रेडिट नहीं बची है । जीत गए तो हम और हर गए तो जिम्मेदार दूसरा । अब ऐसी स्थिति में जनता उन्हें नकारे न तो क्या करे। आज कल चैनल राहुल बाबा राहुल बाबा चिल्लाने में लगें हैं । पर उन्हें झारखण्ड की हार नजर नहीं अ रही है। राहुल बाबा ने वहां प्रत्याशी चुने टिकट देने क निर्णय किया तो फिर हर की जिम्मेदारी उन्ही को लेनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं होगा । कोई न कोई चम्पू (माफ़ करेंगें नेता ) यह जिम्मेवारी अपने ऊपर लेने को तैयार होगा और आशा है उसे उसका उचित इनाम भी मिलेगा । चैनल वालों ने एक बार भी राहुल गाँधी से इस बारे में बात करनी जरूरी नहीं समझा। कारण भी स्पष्ट दिखता है यहाँ जीत नहीं हार मिली है और राजा तथा युवराज हारते नहीं जीतते हैं। और हार क ढिढोरा कैसे पीटा जा सकता है। और राजा के खिलाफ जाने पर उसके कारिंदे आपको नकेल तो कसेंगे ही । तो इसी डर आज चैनल वाले भाई चिल्ला नहीं पाए। अब आइये भाजपा की बात करते हैं वहां भी प्रदेश के ख्यातिनाम नेताओं को जिम्मेदारी दी गयी थी।क्योंकि उनका आलाकमान तो अपना झगरा निपटाने में बयस्त था। अब यशवंत सिन्हा क्या कहेंगें । कहीं ऐसा तो नहीं की संसदी मिली हुई है अब राज्य की चिंता कौन करे। मुंडा साहब क भी हाल कुछ ऐसा ही दिखता है। हम तो चलें दिल्ली और रघुबर दास सरयू राय संभालें झारखण्ड की कमान । नतीजे आ चुके हैं जोड़ तोड़ शुरु हो चुका है इस जोड़ तोड़ में लगा पैसा जबतक सरकार चलेगी तबतक जनता की घधि कमाई से पिचली बार की तरह ली जाएगी। शायद अगली बार जनता जागेगी और किसी एक को सत्ता की चाभी सौंपेगी तब झारखण्ड क कल्याण होगा.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें