जयपुर में दो दिन की चंता के बाद या यों कहें समुद्र मंथन के बाद राहुल रूपी अमृत मिल गया। . इस ऐलान के बाद देश भर में कांग्रेस में ख़ुशी की लहर दौड़ गई की चलो अब तो मैदान मार लिया . हर छोटा और हर बड़ा राहुल बाबा की नाम का माला जपने लगा। पूरे देश की चिंता के लिए जुटे कांग्रेस के लोगों की चिंता शायद देश को लेकर नहीं अपितु केवल पार्टी के लिए थी। . इस समुद्र मंथन में राहुल रूपी अमृत को पिने के लिए हर कांग्रेसल बेताब दिखा परन्तु इस मंथन से किस तरह का विष निकला वह चर्चा गौड़ हो गई। . क्या राज बब्बर क्या आर् पी एन सिंह या फिर जितिन प्रसाद सब राहुल बाबा के गुणगान में लग गए। अपने नेता की बड़ाई का अधिकार सबको है पर कांग्रेस के इस निर्णय से देश को क्या फायदा होगा यह तो आने वाला समय ही बता पायेगा।
अब सवल उठता है की क्या राहुल पार्टी में नंबर दो तक ही सीमित रह जायेंगे या फिर पारी को नंबर दो तक पंहुचा देंगे। क्या राहुल देश की युवा शक्ति को आकर्षित कर कांग्रेस 2014 में फिर से सत्ता में वापस लायेंगे। कांग्रेसी राहुल की कार्य शैली को लेकर तरह तरह की बातें करतें है। उनमे कुछ लोग राजीव गाँधी की छवि देखते है पर पिछले छह महीने की घटनाएँ बताती हैं की राहुल बाबा को देश की सामान्य स्थितियों से शायद कुछ लेना देना नहीं है। संसद में लोकपाल पर विधेयक के दौरान उनके संक्षिप्त भाष ण के अलावा किसी समसामयिक मुद्दे पर उनके मुखारविंद से कभी भी कुछ नहीं निकला। राहुल की ऐसे विषयों पर चुप्पी कहीं पार्टी और देश के लिए भरी न पड़ जाये।


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