सोमवार, 18 मई 2009
अब तो संभालिये अडवानी जी
क्यों गठबंधन धर्म निभाने के चक्कर में अपनी पार्टी का बंटाधार कराने में जुटे हैं । अब तो चेत जाइये । नवीन पटनायक को देख लिया था फ़िर अजित सिंह को देखा थोड़ा और इंतजार कर लीजिये नीतिश और बादलको भी साथ छोड़ते देखना पड़ेगा । जब आपके घटक दलों को आपकी चिंता नहीं है तो फ़िर आप क्यों दूसरो की चिंता में दुबले हो रहें हैं । १७ मई से १८ मई के बस एक दिन में एक बार फ़िर पुरे देश ने मजबूत नेता को कमजोर होते हुए देखा । एक दिन में ही निर्णय बादल गया । इससे एक बार फ़िर ऐसा लगाने लगा की आप अपनी बात पर टिकने वाले नहीं हैं । फ़िर ऐसे में आप में भरोसा न जाता कर देश की जनता ने तो ठीक ही किया । पार्टी और देश दोनों को बख्श दीजिये यह दोनों पर आपका बड़ा उपकार होगा । नौजवानों के सामने बूढों को मत परोसियों आपका कम मार्गदर्शन का है वह करते रहिये । इससे आप भाजपा पर बड़ा उपकार करेंगें । रही बात सहयोगी दलों की तो आप और आपकी पार्टी को कांग्रेस की तरह ही बैशाखी का सहारा लेना चोर देना पड़ेगा अन्यथा न तो घर के रह जायेंगें न ही घाट के। आप सरे जतन कर लें आपके सहयोगी दल समय समय पर ऑंखें दिखातें ही रहेंगें । इसलिए एक बिन मांगी बिनम्र राय mअन लीजिये और एकला चलो का नारा बुलंद कीजिये देखिये सफलता आपकी और आपकी पार्टी के क़दमों में होगी।
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हं.............................!
जवाब देंहटाएंsir, aapki bat sahi hai. mujhe lagta hai ki vikas jaise mudde se bhatakkar bjp ne galat kiya. bare neta ko byaktigat aarop ki sanskriti se bachna chahiye. ab janta mandir-masjtd nahi chahti, sirf kam ki bat sochti hai.
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