गुरुवार, 11 फ़रवरी 2010

मनमोहन जी ध्यान तो जरूर रखिये


यूपीए की चेयरमैन सोनिया गांधी पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी पर फाइनल फैसला लेने की जिम्मेदारी डाल दी गई है। चर्चा है की सोनिया के हां कहने के बाद ही कल होने वाली कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव पर चर्चा होगी और बढ़ोतरी पर फैसला लिया जाएगा।
भाई एक बात समझ में नहीं आ रही है कि क्या सोनिया जी कबिनेट से भी badi हैं। अगर ऐसा नहीं है तो फिर तमाम बड़े सरकारी फैसलों पर पहले सोनिया जी से मुहर क्यों लगवाई जाती है। सरकार किसी मामले पर कमिटी बनती है वह कमिटी सरकार को अपनी रिपोर्ट देती है । यह सरकार का अधिकार है कि वह चाहे तो उसकी रिपोर्ट को स्वीकार करे या अस्वीकार । परन्तु यहाँ यूपीए सरकार एक अलग व्यवस्था बना कर चल रही दिखाती है। अगर सोनिया जी कि बात इतनी ही मानने कि मजबूरी हो तो मनमोहन सिंह को प्रधान मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। क्योंकि ऐसा न कर वह मंत्रिमंडल कि सामूहिकता कि भावना क़ा अपमान कर रहे हैं। यह सही है कि सोनिया गाँधी सत्ताधारी दल कांग्रेस और यूपीए की अध्यक्ष हैं । उनकी राय उनकी पार्टी के लिए मायने रखती होगी पर वह मंत्रिमंडल को फैसले को प्रभावित करें यह तो देश के संविधान क़ा अपमान होगा । लगता है सोनिया और उनकी मंडली हर अच्छे काम क सेहरा अपने सर और बुरे कम क सेहरा प्रधानमंत्री या किसी अन्य मंत्री के सर डाल राजनितिक रोटियां सेंकने में लगे हैं। अगर सोनिया गाँधी पेट्रोल , दीजे के दाम तय कर सकतीं हैं तो अनाज के दामों में भी कमी उन्हें ही करनी होगी और इसके लिया शरद पवार को किसी भी कीमत पर जिम्मेदार नहीं माना जाना चाहिए । हे सोनिया जी हे मनमोहन जी पब्लिक को बेवकूफ बनाना छोडिये और संविधान और उसकी भावना क़ा सम्मान कीजिये दाम घटाइए या बढाइये जनता को तो पिसना है वह पिसती रहेगी और आप अपनी राजनीती चमकते रहिये । आप लोग भारत का भविष्य बना रहें हैं राहुल बाबा उस भविष्य के खेवनहार बन रहें है बनिए और बनाइये पर इतना ध्यान रखिये कम से संवैधानिक मान्यताओं क़ा ध्यान तो जरूर रखिये।

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