शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020

बिहार चुनावः पत्ते खुले मुट्ठी बंद



 बिहार चुनाव अपने रंग में आने लगा है। मुकाबले में जुटे दोनो बड़े गठबंधन और उनके नेता अब अपने पत्ते खोलने लगे हैं ।सभी दलों का घोषणा पत्र जारी हो चुका है । सब के पत्ते खुल गए हैं  लेकिन  वोट देने वालों ने  फिलहाल अपनी मुट्ठी बंद कर रखी है । दोनों गठबंधन  अपनी अपनी प्रभावशाली जीत का दावा कर रहे हैं  और एक दूसरे पर  बिहार को बर्बाद करने का आरोप भी लगा रहे हैं ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बिहार में चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है तो दूसरी ओर कांग्रेस के नेता राहुल गांधी भी चुनाव प्रचार में जुट गए हैं ।प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तो राहुल गांधी के साथ राजद नेता तेजस्वी यादव मंच पर साथ दे रहे हैं ।जैसे-जैसे चुनाव की तिथियां नजदीक आ रहींं हैं वैसे वैसे चुनावी गतिविधियां तेजी पकड़  रही है। हालांकि तमाम सर्वेक्षण के मुताबिक एनडीए गठबंधन एक बार फिर सरकार बना सकता है । दोनों गठबंधन अपनी अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहे हैं और तरह-तरह के दावे कर रहे हैं सच बात यह है कि इस बार बिहार क्या परिणाम देगा यह 10 नवंबर को ही पता चलेगा लेकिन लोजपा के चिराग पासवान रालोसपा के उपेंद्र कुशवाहा जन अधिकार पार्टी के पप्पू यादव और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी इस गठबंधन को कहां और कितना नुकसान पहुंचाएगी जीत और हार का सारा दारोमदार इस पर भी निर्भर करेगा ।राज्य में एंटी इनकंबेंसी भी दिख रही है हालांकि नरेंद्र मोदी के प्रभाव के कारण इस पर कुछ हद तक काबू पाया जा सकता है ।प्रदेश में युवा परेशान हैंं रोजगार की कमी है कोरोना संकट के कारण व्यापार भी मंदी की मार झेल रहा है ऐसे में बिहार की जनता क्या निर्णय देगी यह तो 10 नवंबर को है पता चलेगा। लेकिन कहीं नीतीश  के प्रति नाराजगी एनडीए को भारी ना पड़े । बावजूद इसके यह हर कोई मान रहा है इस चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी दूसरे स्थान के लिए जदयू और राजद में लड़ाई होगी । सहानुभूति की लहर पर सवार लोक जनशक्ति पार्टी कुछ सीटें सकती हैं लेकिन या आंकड़ा अधिकतम 10 तक ही हो सकता है । यह जरूर है कि लोजपा कई विधानसभा क्षेत्रों में जदयू के उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचा सकती है । इसी तरह पप्पू यादव और उपेंद्र कुशवाहा का गठबंधन राजद को कई विधानसभाओं में नुकसान पहुंचा सकता है।

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